किताबों के पन्नो को पलट कर सोचती हूँ
यूँ ही पलट जाए ज़िंदगी तो क्या बात हो
हाथों में मेरे रख दे जो वो हाथ मेरे
तो क्या बात हो
दो कदम चल ले जो वो साथ मेरे
तो क्या बात हो
प्यार से जो वो रख दे सर पे हाथ मेरे
तो क्या बात हो
रोते चेहरे पर जो ला दे कोई हंसी
तो क्या बात हो
जब से चाहा तुझे कुछ और ना चाहा कभी
ज़िन्दगी में जो कभी तू मिल जाए
तो क्या बात हो
यूँ ही चुटकी मे सुलझ जाए हर मुश्किल
तो क्या बात हो
लड़ने से किसी को कुछ ना हासिल हुआ कभी
यूँ बातों ही बातों में उलझने सुलझ जाए
तो क्या बात हो...
यूँ ही पलट जाए ज़िंदगी तो क्या बात हो
हाथों में मेरे रख दे जो वो हाथ मेरे
तो क्या बात हो
दो कदम चल ले जो वो साथ मेरे
तो क्या बात हो
प्यार से जो वो रख दे सर पे हाथ मेरे
तो क्या बात हो
रोते चेहरे पर जो ला दे कोई हंसी
तो क्या बात हो
जब से चाहा तुझे कुछ और ना चाहा कभी
ज़िन्दगी में जो कभी तू मिल जाए
तो क्या बात हो
यूँ ही चुटकी मे सुलझ जाए हर मुश्किल
तो क्या बात हो
लड़ने से किसी को कुछ ना हासिल हुआ कभी
यूँ बातों ही बातों में उलझने सुलझ जाए
तो क्या बात हो...
#SwetaBarnwal
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