ए...! चाय बना देना,
ए..! खाना निकाल देना,
ए..! देखो बगल की चाची आई है, प्रणाम करो,
ए..! दरवाजे के सामने ऐसे क्यूँ खड़ी हो,
बस कुछ इन्हीं शब्दों का आदि हो चुके थे आशा के कान और वो यही सोचती, "क्या सबकी सासु माँ ऐसे ही बात करती हैं"
आशा एक पाढ़ी लिखी और समझदार लड़की थी जो अभी अभी तो मायके से ससुराल तक का सफ़र तय कर आई थी दिल में कई अरमान लिए. बड़े जतन से सबका मान रखती. पर सास का "ए" से संबोधन उसे बहुत खलता, क्या जाता अगर सासु माँ उसे बेटी, बहु या फिर उसके नाम से ही बुला लेती .
फ़िर एक दिन,
ए...! जरा चाय बना देना,
आशा ने सास की बात को अनसुना कर अपने काम मे लगी रही, शाम को पति के घर आते ही सास ने उसकी शिकायत की. आशा भोली और अंजान बनी रही. सास ने अपने वाक्य दुहराया कि शाम को उन्होंने आशा को कहा था कि
"ए...! जरा चाय बना देना"
पर वो अनसुना करके चली गई, तभी आशा ने तुरंत कहा कि यहां "ए" कौन है...?
उसके पति को तुरंत उसकी बात समझ आ गई और उन्हों अपनी माँ को समझाया कि वो आशा को उसके नाम या बेटी या बहु से बुलाया करे ना कि "ए" कह कर, आखिर वो भी तो उसकी बेटी जैसी ही है. सासु माँ को जैसे ही बात समझ आई, उन्हों ने आवाज लगाई...
"बेटी आशा..! जरा चाय बना देना..."
और ये सुन सब खिलखिला कर हंसने लगे...
#SwetaBarnwal
ए..! खाना निकाल देना,
ए..! देखो बगल की चाची आई है, प्रणाम करो,
ए..! दरवाजे के सामने ऐसे क्यूँ खड़ी हो,
बस कुछ इन्हीं शब्दों का आदि हो चुके थे आशा के कान और वो यही सोचती, "क्या सबकी सासु माँ ऐसे ही बात करती हैं"
आशा एक पाढ़ी लिखी और समझदार लड़की थी जो अभी अभी तो मायके से ससुराल तक का सफ़र तय कर आई थी दिल में कई अरमान लिए. बड़े जतन से सबका मान रखती. पर सास का "ए" से संबोधन उसे बहुत खलता, क्या जाता अगर सासु माँ उसे बेटी, बहु या फिर उसके नाम से ही बुला लेती .
फ़िर एक दिन,
ए...! जरा चाय बना देना,
आशा ने सास की बात को अनसुना कर अपने काम मे लगी रही, शाम को पति के घर आते ही सास ने उसकी शिकायत की. आशा भोली और अंजान बनी रही. सास ने अपने वाक्य दुहराया कि शाम को उन्होंने आशा को कहा था कि
"ए...! जरा चाय बना देना"
पर वो अनसुना करके चली गई, तभी आशा ने तुरंत कहा कि यहां "ए" कौन है...?
उसके पति को तुरंत उसकी बात समझ आ गई और उन्हों अपनी माँ को समझाया कि वो आशा को उसके नाम या बेटी या बहु से बुलाया करे ना कि "ए" कह कर, आखिर वो भी तो उसकी बेटी जैसी ही है. सासु माँ को जैसे ही बात समझ आई, उन्हों ने आवाज लगाई...
"बेटी आशा..! जरा चाय बना देना..."
और ये सुन सब खिलखिला कर हंसने लगे...
#SwetaBarnwal

