७० साल का बुड्ढा और ६५ साल की बुढ़िया
(एक अनोखी प्रेम कहानी)
७० वर्षीय खन्ना साहब अपनी गाड़ी से मंदिर से लौट रहे थे कि रास्ते मे एक पेड़ के नीचे एक औरत अकेली बैठी दिखी। गाड़ी रोक वो उनके पास गए पूछा क्या बात है आप थोड़ी परेशान लग रही हैं, मैं कुछ मदद कर सकता हूँ। वो फुट-फुट कर रोने लगी। उन्होंने अपना नाम सुशीला बताया साथ ही ये भी बताया कि उनके एकलौते बेटे बहु ने उनकी सारी संपत्ति अपने नाम कर उन्हें घर से बाहर कर दिया था। खन्ना साहब ने उन्हें ढांढस बंधाया और उन्हें अपने साथ अपने घर ले गए जहां वे खुद भी अकेले रहते थे।
खन्ना साहब काफी सुलझे हुए और तजुर्बेकार इंसान थे। उनके कुछ दिनों की मेहनत और समझाने के बाद सुशीला देवी ने अपने बेटे बहु के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज़ कराया। उनके बेटे बहु को इसकी तनिक भी उम्मीद ना थी। खन्ना साहब का साथ और सुशीला देवी की हिम्मत रंग लाई और वो मुकदमा जीत गई। उन्हें उनका घर, बेटे से मासिक भत्ता और मुआवजे की कुछ राशि मिली जो उनके शेष ज़िंदगी के लिए पर्याप्त था।
बातों बातों में सुशीला देवी जान गई थी कि खन्ना साहब भी अपने बच्चों के हाथों सताए हुए हैं। खन्ना साहब ने एक वृद्धाश्रम भी खोल रखा था जिसमें वो हर मजबूर, बेबस और अपनों के सताए हुए बुजुर्गों को पनाह देते थे और उनकी हर संभव मदद करते थे। खन्ना साहब और सुशीला देवी दोनों ही तन्हाई के साथी थे। दोनों एक दूसरे की काफ़ी कद्र करते थे।
एक दिन खन्ना साहब ने कहा कि क्या आप मुझसे शादी करेंगी। सुशीला देवी को पहले तो ये एक मज़ाक लगा पर फ़िर खन्ना साहब के भाव भंगिमा को देख वो झेंप गई। उन्होंने कहा कि इस उम्र में शादी, लोग, दुनिया, समाज ये सब क्या कहेंगे? खन्ना साहब ने कहा जब हम अपनों के जुल्मों का शिकार हुए थे, तब कहाँ थे ये सब। जब उस वक़्त सारे चुप थे तो फ़िर आज हम क्यूँ सुने उनकी? और वैसे भी एक ७० साल का बुड्ढा और एक ६५ साल की बुढ़िया क्या कर रहे हैं, इससे लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। ये सुन कर सुशीला देवी शर्मा उठी और अपनी स्वीकृति दे दी और दोनों ही एक नई दुनिया की सैर पे निकल पड़े।
#SwetaBarnwal

1 comment:
Wow nice line
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