आखिरी पड़ाव
मैं हो गया ७० का और तू हो गई ६५ की प्रिये,
फिर भी ना जाने क्यूँ मन बावरा है तेरे लिए,
छोड़ दुनिया की सारी फिकर,
आ अब हम तुम फ़िर साथ चल पड़े,
ना अब कोई बंदिश, ना ही कोई आशा,
ना ही मन में है कोई ख्वाब शेष प्रिये...
ना रहे हमारे अब जन्मदाता,
ना ही बच्चों को कोई फिकर हमारी,
ना दुनिया वालो को खबर हमारी,
बस हम तुम हैं अब संग-संग प्रिये...
ना अब ज्यादा सांसें बची है,
ना ही ज़िन्दगी के ज्यादा लम्हें है पास,
तेरे साथ की बस अब ख्वाहिश है,
ना ज़िन्दगी में अब कोई आज़माइश प्रिये...
जो अब तक ना कह सका तुझसे,
आज कहना चाहूं हर बात तुझे,
कुछ अपनी कह डालो कुछ मेरी सुन लो,
जाने कब हो जाए आख़िरी शाम प्रिये...
अहम और वहम मे कट गई सारी जिंदगी,
बस रह गई कुछ धुंधली यादें हैं
इससे पहले कि तन का पंछी उड़ जाए,
भर लूँ बाहों में तुझको एक बार प्रिये...
बहुत हुई शिकवे शिकायत,
बहुत हो गई तु तु - मैं मैं,
रह गए कुछ शब्द कहे - अनकहे,
छोड़ो शब्दों को, आज समझ लें जज़्बात प्रिये...
मैं हो गया ७० का और तू हो गई ६५ की प्रिये,
फिर भी ना जाने क्यूँ मन बावरा है तेरे लिए,
आ जीलें एक बार फिर से ये ज़िन्दगी एक साथ,
तू बन जा १८ की और मैं हो जाऊँ २१ का प्रिये...
#SwetaBarnwal

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