Thursday, 8 March 2018

महिला दिवस...

आओ..महिला दिवस मनाएँ
कुरेद कुरेद कर उनके ज़ख्मों को
भर भर कर उसमे नमक लगाएँ
कल तक जिसके हुस्न, अंग 
और बलात्कार पर लिखते थे
आज उसे माँ और देवी बताकर
उसकी महानता का गुणगान गाते हैं...

फिर कल से शुरू हो जाएगी
अपनी वही दिनचर्या,
फब्तियां कसना, सरे बाज़ार
उनपर kichad उछालना,
अपनी गंदी नज़रों से उनको ताड़ना,
अनचाहे छुअन से शर्मसार करना,
हाए, कैसी है ये रित दुनिया की,
क्यूँ ऐसे दिन दिखलाए, 
एक दिन के लिए है जो वन्दनीय
फ़िर ३६४ दिन क्यूँ रहे निन्दनीय...

#SwetaBarnwal

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