जाने कितनी बार हम
हालातों के आगे मजबूर हुए, कभी टूट कर बिखर गए
तो कभी थक कर चूर हुए...
आँखों के आँसू भी अब तो सूख गए,
सारे अपने भी हमसे रूठ गए
जाने क्या क्या हमने सोचा था,
जाने क्यूँ इस कदर हम बर्बाद हुए...
जिसको भी हमने माना अपना,
वो हर शख्स यहां निकला बेगाना,
मैं भी आज इस कदर बुरा ना होता,
गर हर चेहरे ने मुझको लुटा ना होता...
क्या-क्या ना दर्द सहे हमने,
जाने क्यूँ हम इतने मजबूर हुए
कभी टूट कर बिखर गए,
कभी थक कर चूर हुए...
#SwetaBarnwal
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