ना बाँध मुझे इन जंजीरों में,
मैं भी तेरा अंश हूं माँ
शिक्षा का दे मुझको भी अधिकार,
साथ मे दे दे थोड़ा सा प्यार...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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