Thursday, 15 March 2018

खूबसूरत मुलाक़ात...

आज हम फेसबूकिया दोस्तों की मुलाकात हुई, 
फ़िर क्या बताऊँ यारों क्या क्या बात हुई, 
हर चेहरा अंजाना था, हर शक्स वहां बेगाना था, 
फ़िर भी ना जाने क्यूँ एक अलग ही पहचान हुई... 

थी एक अजनबी दोस्त की शादी का समारोह, 
पहुंचे थे वहां हम सारे online दोस्त 
मन मे थी हमारे मची हलचल चहुँ ओर
जाने वहां मिलेंगे कैसे कैसे लोग... 

यूं तो कई बार बातें हुई थी अपनी online
पर फ़िर भी social media के कई किस्से थे हमने सुने 
कश्मकश के भंवर जाल में फंसा था मन, 
जाने कैसा होगा अनजानों से मिलन... 

सबसे मिल कर फ़िर ख़ुद को ही खो डाला हमने, 
लगा ही नहीं कि ये कोई पहली मुलाकात है अपनी, 
हंसी मज़ाक और नोंक झोंक का दौर चल पड़ा था, 
पर वक़्त जैसे पंख लगा कर उड रहा था... 

बहुत दिनो बाद फ़िर से ज़िंदगी जीने का मौका मिला,
खुद से खुद की मुलाकात हुई, खुशियों की बरसात हुई,
गुम हो गई थी जो हंसी ज़िम्मेदारियों के नीचे
आज फ़िर उसी से कुछ इस कदर पहचान हुई...

बस कुछ पलों का साथ था, 
फ़िर जाने कौन कहाँ होता,
मिलने की शायद उतनी खुशी ना थी 
बिछड़ने का सबको हो रहा था मलाल... 

जाने फ़िर कब कौन कहाँ किसी से मिल पाये 
क्या पता हो ये पहली और आखिरी मुलाकात 
जो पल साथ गुज़ारे थे, उनकी कसक थी अनमोल 
बेगाने भी इतने अपने होंगे ये आज हमने जाना था... 


आज हम फेसबूकिया दोस्तों की मुलाकात हुई, 
फ़िर क्या बताऊँ यारों क्या क्या बात हुई, 
हर चेहरा अंजाना था, हर शक्स वहां बेगाना था, 
फ़िर भी ना जाने क्यूँ एक अलग ही पहचान हुई... 

#SwetaBarnwal 

1 comment:

Praveen kumar said...

इतनी यादें है उस पल की दिल कभी न भूल पाएगा

जब भी बैठेंगे तन्हा हम दोस्त वो पल याद आएगा

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...