आज सोचा कुछ लिखूं,
पर शब्दों से पहले आँसू बिखर पड़े,
तेरे बगैर भी बहुत खुश हूँ मैं,
लिखना ये था, लिख कुछ और गए...
पास आकर कोई अजनबी हो जाए
तो भी इसका कोई गम नहीं होता,
पर कोई अपने रवइये से अजनबी हो
तो बहुत तकलीफ़ हो जाती है...
ये कोई वक़्त की नाराज़गी है हमसे
या फ़िर मेरी किस्मत का लिखा,
जो भी मिला अब तक मुझको,
मेरे दिल से खेल कर निकला...
अब तो डरती हूँ मैं खुद के साये से भी,
आईना भी मुझसे घबरा जाता है,
अक्सर रस्ता बदल लेती हैं खुशियाँ,
मेरे दर तक आते-आते...
#SwetaBarnwal
पर शब्दों से पहले आँसू बिखर पड़े,
तेरे बगैर भी बहुत खुश हूँ मैं,
लिखना ये था, लिख कुछ और गए...
पास आकर कोई अजनबी हो जाए
तो भी इसका कोई गम नहीं होता,
पर कोई अपने रवइये से अजनबी हो
तो बहुत तकलीफ़ हो जाती है...
ये कोई वक़्त की नाराज़गी है हमसे
या फ़िर मेरी किस्मत का लिखा,
जो भी मिला अब तक मुझको,
मेरे दिल से खेल कर निकला...
अब तो डरती हूँ मैं खुद के साये से भी,
आईना भी मुझसे घबरा जाता है,
अक्सर रस्ता बदल लेती हैं खुशियाँ,
मेरे दर तक आते-आते...
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