मेरा मायका मेरा घर
मेरा मायका मेरा घर
जिसमे कभी जान थी,
अब हो गया वो बेजान,
रह गया बन कर सिर्फ़ मकान,
पापा तुम क्या गए,
हो गया सब कुछ विरान,
अब घर घर नहीं लगता,
बन के रह गया एक बियावान,
जहाँ बस्ती है आपकी यादें,
साथ बिताए हर पल हर खुशी,
याद आती है आपकी हँसी,
आपके बिना हो गया सुनसान,
बन कर रह गया वो एक श्मशान,
बिता था उसमे अपना बचपन,
वो मस्ती, वो अटखेलियां, वो अल्हड़पन,
मोहब्बत की झिलमिलाती रौशनी में
बिता था अपना आधा जीवन,
आप जो चले गए छोड़,
दिवाली होली हो गई सब रंगहीन...
पापा तुम क्या गए,
हो गया सब कुछ विरान,
अब घर घर नहीं लगता,
बन के रह गया एक बियावान...
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