आज फिर से बीती हुई ज़िन्दगी की
रवानी याद आती गई,
जो हुआ करता था कभी अपना हिस्सा
वो कहानी याद आती गई...
#SwetaBarnwal
रवानी याद आती गई,
जो हुआ करता था कभी अपना हिस्सा
वो कहानी याद आती गई...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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