Thursday, 15 March 2018

वो पागल सा लड़का

वो पागल सा लड़का,
हर बात में सबसे उलझता था,
किसी से लड़ता था
तो किसी से भिड़ता था,
कुछ ऐसी ही पहचान थी उसकी,
जाने क्या उसके मन में चलता था,
वो पागल सा लड़का...

एक दिन मिला वो मुझको
अनजाने राहों पे एक अनजानी डगर पे,
चला कुछ पल को साथ मेरे,
खुब हंसा और जी भर के हंसाया
कुछ लम्हों में उम्र भर का रिश्ता बनाया,
वो पागल सा लड़का...

बेबाकपन था बातों मे उसके,
कुछ अलग ही अंदाज़ का वो मालिक था,
मस्तमौला सी छवि थी उसकी,
गुस्से की ना कोई निशानी थी,
बिल्कुल अलग ही उसकी कहानी थी
वो पागल सा लड़का...

गुज़ारे हमने संग कुछ हसीन लम्हें,
कुछ गुदगुदाते, कुछ लड़ते झगड़ते,
बड़ा ही हाज़िर जवाबी था वो,
सच कहूं तो, यारों का भी यार था वो,
बड़ा ही खुशमिज़ाज़ वो मेरा दोस्त है आज
वो पागल सा लड़का...
हर बात में सबसे उलझता था... 

#SwetaBarnwal 

1 comment:

Praveen kumar said...

बहुत सुंदर

कई बार हम देखते कुछ और हैं और होता कुछ और है

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...