Saturday, 17 March 2018

कुछ चीजें इस कदर खरीद ली हमने दुनिया के बाज़ार से, 
कि खरीदार भी ना बदला और हम उसके हक़दार हो बैठे...

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...