Sunday, 18 March 2018

हमने भी कब चाहा था कि इश्क़ हमारा मुकम्मल हो,
बस वफ़ा की चाहत थी और ताउम्र प्यार का वादा था...

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...