Friday, 10 January 2020

ज़िंदगी...,

अपनी ज़िंदगी की आज मैं किस्से सुनाता हूँ,
बीते हुए लम्हों की उसमें मैं मोती पिरोता हूँ,
कभी मेरी ज़िंदगी में खुशियों का तराना था,
आज तो बस खुशियों का बहाना है,
खुल कर हंसा करता था कभी,
आज बस दिखावे की हंसी रखता हूँ,
आँसुओं को अपने पलकों के पीछे छुपाता हूँ,
दर्द को अपने मैं इस दुनिया से छुपाता हूँ,
ना चाहूँ फ़िर भी बेबाक हंसता हूँ,
इस हंसी के पीछे हर तकलीफ़ छुपाता हूँ,
ख़ुशी बांट कर ख़ुद के लिए ग़म संजोता हूँ,
महफ़िल में रह कर भी ख़ुद को तन्हा पाता हूँ,
अपनों के बीच भी बेगाना बना रहता हूँ,
जिसे भी चाहा उससे दूर हुआ जाता हूँ,
अकेले जब भी होता हूँ
बीते लम्हों को मैं याद करता हूँ,
ज़िम्मेदारियों के बोझ ने मुझको बुढ़ा बना दिया,
पर आज भी दिल में अपने मैं बचपना संजोता हूँ,
बहुत दूर आ चुका हूँ मैं चलते चलते,
अब थोड़ी देर के लिए मैं सुस्ताना चाहता हूँ,
कोई सम्भाल ले मुझको अपने पनाहों मे,
अब और नहीं ज़िंदगी से मैं टकराना चाहता हूँ...


#SwetaBarnwal 

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