अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
अरे अब तो जागो ऐ वीर सपूतों,
तोड़ो तुम आलस की बेड़ी को,
आन पड़ी है विपदा फ़िर से,
त्यागो तुम अपनी चिर निद्रा को,
भरो ऐसा ओज तुम अपने आने वाली पीढ़ी मे,
भारत माँ के शान के ख़ातिर चढ़ जाए वो बलिवेदी पे,
दिखे नहीं अब द्रोही ध्वज, भगवा ही अपनी शान है,
आतंकी टोली का अब रहे नहीं नाम - ओ-निशान है
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
जंग पडी जो तलवारों मे
उस पर अब धार चढ़ानी है,
आंख उठे जो हिन्दुत्व पे कोई,
उसको औकात दिखानी है,
कहाँ गई वो ओज प्रताप की,
जिसने अकबर को धूल चटाई थी,
कहाँ गई वो लक्ष्मी बाई,
जो चंडी बन दुश्मन पर लहराई थी,
कहाँ गई वो भगत, सुखदेव और राजगुरू की टोली है,
जिसने संसद में आग लगा कर दुश्मनों मे हड़कंप मचाई थी,
मचा हुआ है हाहाकार देश में,
और तूने है सर पर चादर तानी,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
करते रहो तुम बातेँ गंगा जमुना तहजीब की,
और सिखाओ अपने बच्चों को हिंदू मुस्लिम भाई भाई,
ये बम के गोले फेंकेगे, तुम हाथ जोड़े प्रणाम करो,
अपनी कायरता का तुम नतमस्तक हो सम्मान करो,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
आख़िर कब तक तुम बातेँ करोगे भाई चारे और प्रेम की,
कब तक ईद की मुबारक बात देने उसके जाओगे,
कब तक love zihad मे अपनी बहन बेटियों को नीलाम करोगे,
कब तक आतंकवाद का नंगा नाच तुम देखोगे,
आख़िर कब तक भारत के टुकड़े करने वालों को हम सर का ताज बनाएंगे,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
कब तक मुस्लिम तुष्टीकरण के ख़ातिर बलि तुम्हारी दी जाएगी,
कब तक 30% मुस्लिम वोट बैंक 70% हिन्दुओं को धूल चटाएंगे,
आख़िर कब तक हम नेताओं के हाथों की कठपुतली बन कर नाचेंगे,
भारत पाक के मैच में वो पाक के जीत का जश्न मनाता है,
हमारे टैक्स के पैसों से देखो वो अपनी आबादी बढ़ाता है,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
भूल गए क्या तुम भारत माँ के उन टुकड़ों को,
जब भी माँ का अंग कटा, एक नया इस्लामिक राष्ट्र बना,
लगता है भूल गए तुम 47 के उस बंटवारे को,
पूरी ट्रेनें भर कर आई थी हिन्दुओं की लाशों से,
अरे छोड़ो उन दिनों की बातों को, मैं आज की बात बताती हूँ,
खाते हैं ये भारत का और गुणगान पाक का गाते हैं,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
जिस थाली में खाते हैं ये उसी मे थूक कर फिर जाते हैं,
भारत माँ की छाती पर ये आतंकवाद फैलाते हैं,
जब भी मौका मिलता है ये विद्रोही हो जाते हैं,
भारत के टुकड़े करने का ये ख्वाब सजाये फिरते हैं,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
महादेव का आह्वान करो, वाणी मे अपने ओज भरो,
दुष्टों से पट जाए धरती, महाकाल सा काल बनो,
कोलाहल मच जाए जग में ऐसी तुम हुंकार भरो,
भारत के टुकड़े करने वालों का अब तुम स्वयं संहार करो,
गद्दारों के लहू से रक्त रंजीत हो जाए ये भूमि ऐसा तुम प्रहार करो
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
#SwetaBarnwal
अरे अब तो जागो ऐ वीर सपूतों,
तोड़ो तुम आलस की बेड़ी को,
आन पड़ी है विपदा फ़िर से,
त्यागो तुम अपनी चिर निद्रा को,
भरो ऐसा ओज तुम अपने आने वाली पीढ़ी मे,
भारत माँ के शान के ख़ातिर चढ़ जाए वो बलिवेदी पे,
दिखे नहीं अब द्रोही ध्वज, भगवा ही अपनी शान है,
आतंकी टोली का अब रहे नहीं नाम - ओ-निशान है
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
जंग पडी जो तलवारों मे
उस पर अब धार चढ़ानी है,
आंख उठे जो हिन्दुत्व पे कोई,
उसको औकात दिखानी है,
कहाँ गई वो ओज प्रताप की,
जिसने अकबर को धूल चटाई थी,
कहाँ गई वो लक्ष्मी बाई,
जो चंडी बन दुश्मन पर लहराई थी,
कहाँ गई वो भगत, सुखदेव और राजगुरू की टोली है,
जिसने संसद में आग लगा कर दुश्मनों मे हड़कंप मचाई थी,
मचा हुआ है हाहाकार देश में,
और तूने है सर पर चादर तानी,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
करते रहो तुम बातेँ गंगा जमुना तहजीब की,
और सिखाओ अपने बच्चों को हिंदू मुस्लिम भाई भाई,
ये बम के गोले फेंकेगे, तुम हाथ जोड़े प्रणाम करो,
अपनी कायरता का तुम नतमस्तक हो सम्मान करो,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
आख़िर कब तक तुम बातेँ करोगे भाई चारे और प्रेम की,
कब तक ईद की मुबारक बात देने उसके जाओगे,
कब तक love zihad मे अपनी बहन बेटियों को नीलाम करोगे,
कब तक आतंकवाद का नंगा नाच तुम देखोगे,
आख़िर कब तक भारत के टुकड़े करने वालों को हम सर का ताज बनाएंगे,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
कब तक मुस्लिम तुष्टीकरण के ख़ातिर बलि तुम्हारी दी जाएगी,
कब तक 30% मुस्लिम वोट बैंक 70% हिन्दुओं को धूल चटाएंगे,
आख़िर कब तक हम नेताओं के हाथों की कठपुतली बन कर नाचेंगे,
भारत पाक के मैच में वो पाक के जीत का जश्न मनाता है,
हमारे टैक्स के पैसों से देखो वो अपनी आबादी बढ़ाता है,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
भूल गए क्या तुम भारत माँ के उन टुकड़ों को,
जब भी माँ का अंग कटा, एक नया इस्लामिक राष्ट्र बना,
लगता है भूल गए तुम 47 के उस बंटवारे को,
पूरी ट्रेनें भर कर आई थी हिन्दुओं की लाशों से,
अरे छोड़ो उन दिनों की बातों को, मैं आज की बात बताती हूँ,
खाते हैं ये भारत का और गुणगान पाक का गाते हैं,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
जिस थाली में खाते हैं ये उसी मे थूक कर फिर जाते हैं,
भारत माँ की छाती पर ये आतंकवाद फैलाते हैं,
जब भी मौका मिलता है ये विद्रोही हो जाते हैं,
भारत के टुकड़े करने का ये ख्वाब सजाये फिरते हैं,
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
महादेव का आह्वान करो, वाणी मे अपने ओज भरो,
दुष्टों से पट जाए धरती, महाकाल सा काल बनो,
कोलाहल मच जाए जग में ऐसी तुम हुंकार भरो,
भारत के टुकड़े करने वालों का अब तुम स्वयं संहार करो,
गद्दारों के लहू से रक्त रंजीत हो जाए ये भूमि ऐसा तुम प्रहार करो
अब तो जागो हिन्दुओं, कि मैं तुम्हें जगाने आई हूँ...
#SwetaBarnwal
No comments:
Post a Comment