Wednesday, 10 June 2020

अमर प्रेम...

कोई नाता नहीं 
फ़िर भी खास है वो, 
लगता है जैसे 
हर पल पास है वो, 
अनजानी सी डोर है, 
खिंचे उसकी ओर है, 
इस जन्म का या फिर 
कई जन्मों का, 
पता नहीं ये
कैसा बंधन है, 
ना रस्मों रिवाज़ की 
बंदिश कोई, 
ना इस रिश्ते का 
कोई नाम है, 
ना मानो तो 
कुछ नहीं 
और मानो तो 
राधा कृष्ण का 
प्यार है, 
कुछ ऐसे भी 
रिश्ते होते हैं 
जो बिन रस्मों के 
बंध जाते हैं, 
ना जाने ऐसे रिश्ते 
दुनिया में क्या 
कहलाते हैं, 
ये दिल के 
रिश्ते होते हैं 
जो दिल ही दिल 
मे पलते हैं,
नाम ना दो 
कोई इसको, 
ये अमर प्रेम 
कहलाते हैं... 

#SwetaBarnwal 

2 comments:

Anonymous said...

Bahut hi sundar likhe hain mam. Itne pyar se rishton ko vyakt kiya hai aapne. Aapki lekhni ka koi jabab nahi. Likhte rahen. Namaste.

Sweta kumari Barnwal said...

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय... 🙏🏻

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