Wednesday, 10 June 2020

चन्द लम्हें...

यूँ अचानक किसी मोड़ पर, 
एक रोज़ उनसे टकरा गए, 
मिली जो नजरों से नज़र,
दिल में दफन अनकही बातेँ 
लबों पर आने लगी, 
कदम लड़खड़ाने लगे,
आंखें शर्माने लगी, 
हुआ कुछ ऐसा असर
ना वो रहे होश में 
और ना ही मुझको कोई खबर, 
चंद लम्हों मे जैसे 
सदियां गुज़र गई, 
ये जो लुढ़क कर 
दामन में हमारे 
वक़्त आ गया, 
गुज़रा हुआ कल 
पल में आज हो गया, 
उलझी हुई थी ज़िन्दगी, 
मिली जो उनसे 
तो गुलज़ार हो गई, 
ख़ुद से ही जैसे मैं 
बेज़ार हो गई, 
फ़िर से गुम ना हो जाए 
ये लम्हा कहीं, 
यही सोच हाथ बढ़ाया 
समेटने को इसे, 
अगले ही पल 
नींद टूटी और 
ख़ुद को तन्हा पाया, 
जो किस्मत में ही नहीं 
जाने वो कैसे सपनों में आया, 
झूठे ख्यालों से ही सही 
मेरे मन को हर्षाया... 


#SwetaBarnwal 

3 comments:

Anonymous said...

Excellent poem... You write on all topics. Deshbhakti, love, relationships.. you are awesome writer.
God bless you always

Anonymous said...

आपकी कविताओं का यूँ अंदाज़-ए-बयां...
उफ्फ...
बहुत ही कातिलाना...

Anonymous said...

Loveful and heartfelt poem.

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