Wednesday, 1 July 2020

धर्म से अधर्म...

मन में श्रद्धा और भक्ति भाव लिए
सब तेरी चौखट आते हैं,
स्वार्थ और लोलुपता वश
उनके मन को छलता है तू
प्रभु चरणों को छोड़ पाखंडी
तू अल्लाह अल्लाह भजता है,
मन में जिसके कृष्ण और राम बसे हैं,
तू उनका दोहन करता है,
जिसने तुझको जन्म दिया,
छल तू उनसे करता है...
घर मंदिर सब छोड़ छाड़ वो
तेरे दर पर आते हैं
तुझको सुनने के ख़ातिर,
श्रद्धा सुमन वो लाते हैं,
तेरी वाणी पर नाज था उनको,
तुझको देव दूत वो समझते थे,
वेदों का ज्ञाता मान तुझे,
तुझपे सर्वस्व लुटाया था,
पर ओ अधर्मी तूने 
धन और संपत्ति की चकाचौंध मे,
भुला दिया तूने 
सत्य सनातन हिन्दू धर्म को,
व्यासपीठ पर बैठ के तूने
इस्लाम से अपना नाता जोड़ा,
भूल गए तुम कृष्ण की मुरली,
और भूले तुम शिव के विष पान को,
श्लोकों को बिसरा कर तूने
फिल्मी गानों पर नाच नचाया,
जिसने तुझको पूजा
तुझको इतना सम्मान दिया,
भौतिक सुख के लालच में 
उसपर ही प्रहार किया
हिन्दू होकर भी तूने 
हिन्दू धर्म का अपमान किया,
हमारी आस्था को तोड़ तूने 
अपना ही सर्वनाश किया
व्यास पीठ पर बैठ के तुझको
कुरान नहीं अब पढ़ने देगा 
जाग चुका है हिन्दू अब तो,
और अन्याय नहीं यह होने देगा...

#SwetaBarnwal

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