Monday, 8 October 2018

जिन लम्हों में तुम शामिल ना हो,
ऐसा कोई लम्हा हमने जिया नहीं,
तुझसे जुदा हो कर जीना पड़े,
वो ख्वाब हमने कभी देखा नहीं...

#SwetaBarnwal 
ऐसा कोई पल नहीं होता,
जब तेरे होने का एहसास नहीं होता...
सांसे तो आती जाती रहती है,
तेरी याद उन साँसों से पहले आती है...


#SwetaBarnwal 

Sunday, 7 October 2018

ऐ ज़िंदगी...!
अब मेरा हिसाब कर दे,
थोड़े मे ही सही
मुझको बेहिसाब कर दे...

#SwetaBarnwal 
तुझसे दूर जाते जाते हम
तेरे और करीब हो गए...
हम तेरी चाहत ना बन सके,
और तुम मेरा नसीब हो गए ..

#SwetaBarnwal
आप से तुम
तुम से तू कहने लगे,
जो कभी दूर थे
वो अब रूबरू होने लगे...

#SwetaBarnwal

किसी शाम आ जाओ तुम चाय पर...

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर
हमसे मिलने
किसी बहाने से,

मिल बैठेंगे संग संग
उड़ेंगे जज़्बातों के रंग
दो घड़ी दो पल
या फिर दो लम्हें,
मुट्ठी में बांध
कैद कर उन्हें ले जाएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

कुछ यादों के 
किस्से बुनेंगे, 
कुछ अहसासों के
धुएं उड़ेंगे,
कुछ कदम हम तुम
संग चलेंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

कुछ अपनी कहेंगे
कुछ तुम्हारी सुनेंगे,
जी भर कर फिर हम
बातें करेंगे,
उन लम्हों में हम
फ़िर से सदीयां जियेंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

तेरे साने पे रख के सर 
तुझसे तेरी ही बातें करेंगे, 
कुछ रह जाए बाकि गर 
आँखों में पढ़ जाना तुम, 
उन लम्हों में ही 
सौ जन्मों को हम जियेंगे, 

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

यूँ ही साथ बैठेंगे
हंसेंगे हसाएंगे,
कुछ कहकहे लगाएंगे
कोई धुन गुनगुनाएंगे,
तुम सुर देना
और हम ताल मिलाएँगे,
एक दूजे की बाहों में
हम यूँ ही झूल जाएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

बहुत थक चुकी है ज़िंदगी
इस कदर भागते भागते,
कुछ पल सुकून से
हम तुम साथ बिताएंगे
इस भागम भाग की ज़िंदगी में
कुछ लम्हें खुशी की जिएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर
हमसे मिलने
किसी बहाने से... 


#SwetaBarnwal




तेरी हर एक आवाज़ पे हम फिदा हैं,
इन्हें ख़ामोशियों में ना बांधों तुम,
हमारी मोहब्बत को किसी दायरे में ना समेटो तुम,
ये तो बेइंतहा, बेहिसाब और बेपनाह है...

#SwetaBarnwal 

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...