Tuesday, 28 August 2018

वो अपनी पहली मुलाकात,
और हम दोनों ही मजबूर थे...
हम जुल्फें ना संभाल सके,
और वो खुद को...

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...