तकदीर ने जब जैसे चाहा बदल गए हम,
संभल कर चले फिर भी फिसल गए हम,
हमे लगता है दुनिया बदल गई है,
पर लोगों को लगता है बदल गए हैं हम...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
No comments:
Post a Comment