Wednesday, 27 February 2019

पुलवामा...

भारत देश के कोने कोने में अब भगवा लहराएगा,
कश्मीर तो छोड़ो पूरा पाकिस्तान भी अपना हो जाएगा

हिमालय की चोटी से अब चहूं ओर बहेगी गंगा
लाहौर की सरजमी पे अब फहराएगा अपना झंडा
अब युगों युगों तक नेहरू जिन्ना जैसा शैतान नहीं होगा
भारत माता की गोद में अब कोई आतंकवाद नहीं होगा
Loc के आर पार अब पूरा भारत एक होगा
चाणक्य के अखण्ड भारत का अब ख्वाब पूरा होगा

भारत देश के कोने कोने में अब भगवा लहराएगा,
कश्मीर तो छोड़ो पूरा पाकिस्तान भी अपना हो जाएगा

ज़हर पिला कर मज़हब का इन कश्मीरी लोगों से
भय और लालच दे कर इनको पत्थर बरसा रहे वीरों पे
बहुत हो गई बातचीत अब कोई समझौता ना होगा
भारत माँ के वीर सपूतों का बलिदान व्यर्थ ना होगा
आ गया वक़्त पाकिस्तान को अब ये बतलाना होगा
उसकी असली औकात अब उसे दिखलानी होगी
अहिंसा हमारी कमजोरी नहीं दरियादिली है
अपने ताकत का उसको थोड़ा एहसास कराना होगा

हिंदुस्तान के कोने कोने में अब भगवा लहराएगा,
कश्मीर तो छोड़ो पूरा पाकिस्तान भी अपना हो जाएगा

लाल कर दिया लहू से तूने पुलवामा की घाटी को
सिसकने को मजबूर कर दिया आज इस देश की माटी को
इन निहत्थे सैनिकों का अब बलिदान ना खाली जाएगा
४० के बदले ४०० को मौत की नींद सुलाया जाएगा
इतने पे भी जो तुझे अकल ना आई
तो अंजाम तुझे भुगतना होगा
बहुत हो चुकी मक्कारी अब बहुत हो चुका आतंकवाद
संभल जा अब भी वर्ना उबल पड़ेगा सारा हिंदुस्तान

भारत देश के कोने कोने में अब भगवा लहराएगा,
कश्मीर तो छोड़ो पूरा पाकिस्तान भी अपना हो जाएगा

Tuesday, 26 February 2019

मौन नहीं रहना हमको...

देश झुलस रहा है आज हमारा आतंकी हमलों से
और सिपाही कुचले जा रहे हैं पत्थर की फौज़ों से
नही लिखना है आज हमे हास्य प्रेम या करुण पुकार
ऐसी वाणी भरनी है जो हर बच्चा बन जाए महाकाल
वीर शहीदों की छवि बसी है इन नैनन की ज्योति मे
देश की रक्षा की खातिर जिसने अपना सर्वस्व बलिदान दिया
अब तो सबक सिखाना होगा पाक को ये बतलाना होगा
छुप कर जिसने वार किया इंसानियत को शर्मसार किया
अब इनको इनकी असली औकात दिखानी होगी
भारत की असली शक्ति अब इनको बतलानी होगी
दे दो खुली छूट हमारी सेना को अब मौन नहीं रहना हमको
मिटा डालो पाक को नक्शे से कि अब और नहीं सहना हमको


#SwetaBarnwal 

Monday, 25 February 2019

मेरे हमसफ़र....

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

चाहे हो राहों में कितने भी कांटे
या हो फिर गमों की अंधियारी रातें
ना छोड़ना कभी तुम दामन मेरा
मिल जाएगी मंज़िल साथ हो तुम अगर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

धुंध मे जो खो जाए ये रस्ता कभी
रूठ कर जो हो जाए तुमसे खफा कभी
कस कर समेट लेना मुझको बाहों में तुम
जल उठेंगे सौ दिए हर तम को चीर कर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

छोटा सा बसाएंगे हम अपना आशियाँ
होगा वहीं पे अपने सपनों का जहां
मिले इस कदर कि बिछड़े ना कभी
खुशियाँ हो हर पल ना हो गमों का बसर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

#SwetaBarnwal

Tuesday, 12 February 2019

चला जा रहा था मैं ज़िंदगी को जीते...

ज़िन्दगी की अनजान राहों पर
मन में यूँ ही कई सवाल लिए
अपने और परायों के बीच से गुज़रते
चला जा रहा था मैं ज़िंदगी को जीते,

कहाँ था जाना और क्या था पाना
ना ही रास्ते की थी कोई पहचान
और ना ही मंज़िल का था ठिकाना
आश और निराश मे लगाते हुए गोते
चला जा रहा था मैं ज़िंदगी को जीते,

अपने ही ख्यालों में मैं चला जा रहा था
ज़िन्दगी को बेपरवाह जिए जा रहा था
वक़्त को अपनी मुट्ठी में कैद किए
अपने ही अरमानों की आहुति देते
चला जा रहा था मैं ज़िंदगी को जीते,

कभी हारता तो कभी खुद से जितता
ज़िन्दगी से हर घड़ी कुछ सीखता रहा
ठोकरों से गिरता कभी गिर के संभलता
हर चोट पे अपने ख़ुद से मरहम लगाते
चला जा रहा था मैं ज़िंदगी को जीते,

#SwetaBarnwal 
दिल के राज़ किसी के सामने तो खोलो,
जो है दिल में तेरे उसे होठों से तो बोलो,
कट जायेगा ये जीवन का सफ़र प्यार से,
एक बार तुम किसी के हो कर तो देखो...

#SwetaBarnwal

Monday, 11 February 2019

बसंत...

आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
महकी हर कली
भँवरा मंडरायो रे
नैनो मे सपने सजे
हर अंग अंग खिले
कल कल छल छल
ये नदी लहराए रे
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
मन मोरा हर्शाये
नैनों में सपने सजाए
रोम रोम ले अंगडाइयाँ
ओ मोरे सजनवा
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
धरती दुल्हन बन शर्माई
खेतों में देखो
पीली सरसों है लहराई
सूखी पड़ी धरा
आज फ़िर से लहलहाई
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
माता सरस्वती का
आगमन हुआ देखो
प्रकृति आज एकबार
फ़िर से खिलखिलाई
खिली हर डाली
वसुंधरा प्रेम के गीत गाए
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
मन में उमंगे जगे
हर दिल में प्यार खिले
होली के रंगों में
रंग गई दुनिया सारी
अमृत रस घोल रही
कोयलिया बोल रही
खेल रही गौरेया
नया नया रंग लिए
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे...


#SwetaBarnwal 

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...