Monday, 11 February 2019

बसंत...

आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
महकी हर कली
भँवरा मंडरायो रे
नैनो मे सपने सजे
हर अंग अंग खिले
कल कल छल छल
ये नदी लहराए रे
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
मन मोरा हर्शाये
नैनों में सपने सजाए
रोम रोम ले अंगडाइयाँ
ओ मोरे सजनवा
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
धरती दुल्हन बन शर्माई
खेतों में देखो
पीली सरसों है लहराई
सूखी पड़ी धरा
आज फ़िर से लहलहाई
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
माता सरस्वती का
आगमन हुआ देखो
प्रकृति आज एकबार
फ़िर से खिलखिलाई
खिली हर डाली
वसुंधरा प्रेम के गीत गाए
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे
मन में उमंगे जगे
हर दिल में प्यार खिले
होली के रंगों में
रंग गई दुनिया सारी
अमृत रस घोल रही
कोयलिया बोल रही
खेल रही गौरेया
नया नया रंग लिए
आयो रे आयो
देखो बसंत आयो रे...


#SwetaBarnwal 

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