Monday, 25 February 2019

मेरे हमसफ़र....

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

चाहे हो राहों में कितने भी कांटे
या हो फिर गमों की अंधियारी रातें
ना छोड़ना कभी तुम दामन मेरा
मिल जाएगी मंज़िल साथ हो तुम अगर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

धुंध मे जो खो जाए ये रस्ता कभी
रूठ कर जो हो जाए तुमसे खफा कभी
कस कर समेट लेना मुझको बाहों में तुम
जल उठेंगे सौ दिए हर तम को चीर कर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

छोटा सा बसाएंगे हम अपना आशियाँ
होगा वहीं पे अपने सपनों का जहां
मिले इस कदर कि बिछड़े ना कभी
खुशियाँ हो हर पल ना हो गमों का बसर

मेरे ज़िंदगी के सफर के ओ मेरे हमसफ़र
चलना साथ मेरे तुम यूँ ही उम्र भर

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...