Sunday, 3 May 2020

भारत माँ के चरणों में मैं नित शीश नवाया करती हूँ,
वीर शहीदों की गाथाओं को मैं रोज दुहराया करती हूँ...

#SwetaBarnwal


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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...