Friday, 3 July 2020

आत्मनिर्भर स्त्री...

स्त्री अगर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी हो,
तो आसान नहीं होगा उसके साथ प्रेम,
ऐसा नहीं कि उसे प्रेम स्वीकार नहीं,
और ना ही ये कि उसे प्रेम की समझ नहीं,
बस हर बात पे झुकना उसे मंजूर नहीं,
नहीं मिला पाती है वो तुम्हारी हाँ मे हाँ,
सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने का साहस रखती है वो,
वो ना तो रूठना जानती है और ना झूठी खिदमत करती है,
वो तुम्हारे अन्याय को चुपचाप सहना नहीं जानती है, 
जो करती है दिल से करती है, वर्ना छोड़ देती है.
उसकी ना का मतलब ना ही होता है, ये मनवाना जानती है वो,
वो तर्क और वितर्क करना जानती है,
अपनी बातों का मान रखना जानती है वो,
तुम्हें, तुम्हारे घर और बच्चों को भी सम्भालना जानती है वो,
सिर्फ़ घर में ही नहीं, वो बाहर भी तुम्हारा संबल बनती है,
वो सम्मान के बदले में सम्मान और प्यार के बदले में प्यार पाना चाहती है,
वो मोम की गुड़िया बन रहना नहीं जानती है,
ना वो सिर्फ बिस्तर की शोभा बन जीना जानती है,
वो ख़ुद को सजाती और संवारती है अपने आत्मविश्वास से, 
वो कभी अपनी जरूरतों और अनावश्यक की मांग ले तुमसे नहीं लड़ती, 
मगर फ़िर भी वो लड़ती है, पड़े जरूरत तो प्रतिकार भी करती है,
अपने स्वाभिमान के लिए हर मुश्किल से टकराना जानती है वो,
पर अगर जो किया अनादर तो अपने मान की रक्षा करना भी जानती है,
नहीं झुकती है कभी वो तुम्हारे पुरुषत्व के दंभ के आगे,
पर तेरे निश्छल प्रेम पर अपना सर्वस्व लुटाना जानती है वो,
आसान नहीं होता है ऐसी स्त्री से प्रेम करना,
बड़ी बड़ी मुसीबतों से टकराने का हौसला रखती है वो,
मगर टूट कर बिखर जाती है तेरे झूठ, फरेब और पुरुषत्व के अहंकार से टकरा कर,
और रह जाती है शेष सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कभी ना ख़त्म होने वाली ख़ामोशी...


#SwetaBarnwal 

2 comments:

Anonymous said...

Dear Mam
Ye poem context wise bahut hi acchi hai.
नहीं झुकती है कभी वो तुम्हारे पुरुषत्व के दंभ के आगे,
पर तेरे निश्छल प्रेम पर अपना सर्वस्व लुटाना जानती है वो,
आसान नहीं होता है ऐसी स्त्री से प्रेम करना,
बड़ी बड़ी मुसीबतों से टकराने का हौसला रखती है वो..
Itne acche se kisi aatm nirbhar stree ke swavalamban aur Prem ka tana bana joda hai wo kaaabile taarif hai

Aur iska first two lines to apne aap me bahut hi hai hai

स्त्री अगर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी हो,
तो आसान नहीं होगा उसके साथ प्रेम

Waah nihshabd hun.. prashansha ke liye shabd kam pad gaye.

Dher saara samman ke sath.

Sweta kumari Barnwal said...

आदरणीय,
आपके उत्साहवर्धक शब्दों के लिए सहृदय धन्यवाद. आप भविष्य में भी इसी प्रकार हमारा मार्गदर्शन करते रहें, इसकी अभिलाषा रखते हैं... 🙏🏻

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