Sunday, 7 October 2018


तेरी बेरुखी ने हमे
मजबूर कर दिया,
तेरे इश्क़ मे क्या पड़ी
मगरूर कर दिया,
सोचा छोड़ जाऊँ
तुझे भी दर्दे दिल देकर,
पर मेरे चाहत की
इन्तेहां तो देखो,
तुझसे दूर होते होते
हमने ख़ुद को खुद से
दूर कर लिया...

#SwetaBarnwal
जिस दिल में हम रहें एहसास बनकर,
वहां दर्द का कोई बावस्ता नहीं...

#SwetaBarnwal
ज़िन्दगी फिसलती जा रही है अपने हाथों से
रेत की तरह,
पर वो इश्क़ आजतक ना मिला जो हमें
मुकम्मल कर जाए...

#SwetaBarnwal

Saturday, 6 October 2018

तेरी नज़रअंदाज़गी और बेरुखी ने ही सील दिये हैं होंठ मेरे,

अब तुम्हीं बताओ कैसे कहूँ  कि तेरी बहुत याद आती है...!!

#SwetaBarnwal 

Friday, 5 October 2018

स्त्री...

मुमकिन नहीं है शब्दों में
ख़ुद को कभी बांध पाऊं,
जो चाहूं कभी लिखना
कुछ अपने बारे में,
उनको कागज पर
मैं उतार पाऊं,
कोई अपना हो कर भी
अपना नहीं है,
कोई कुछ ना हो कर भी
सबकुछ लगता है,
जी चाहता है अब
तोड़ दूँ सारी हदें
उड़ जाऊं इस कैद से
छू लूँ ऊंचे आसमां को,
गर एक साथ जो तेरा
मिल जाए मुझको
ख़ुद से ख़ुद की मैं
पहचान करा जाऊं,
ऐ यारा...! बस कर दे
इतना सा करम,
बिखर कर खुद
मैं तुझमे समा जाऊं...

#SwetaBarnwal

Thursday, 4 October 2018


कुछ लोग बिना मिले सदियों का बंधन जोड़ जाते हैं,
और कुछ लोग तो मिल कर भी अजनवी रह जाते हैं...

#SwetaBarnwal

Tuesday, 2 October 2018

Kuchh dil k nazma parosti hun,
Kuchh दुनिया k gum chura lati hun,
Kuchh hal-e-dil suna jati hun,
Kuchh ankahe jazbat bayan kar jati hun,
Mere shabdon se dil na lagana yaron,
In shabdon se दिल me toofan macha jati hun....

Sweta Barnwal

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...