मुमकिन नहीं है शब्दों में
ख़ुद को कभी बांध पाऊं,
जो चाहूं कभी लिखना
कुछ अपने बारे में,
उनको कागज पर
मैं उतार पाऊं,
कोई अपना हो कर भी
अपना नहीं है,
कोई कुछ ना हो कर भी
सबकुछ लगता है,
जी चाहता है अब
तोड़ दूँ सारी हदें
उड़ जाऊं इस कैद से
छू लूँ ऊंचे आसमां को,
गर एक साथ जो तेरा
मिल जाए मुझको
ख़ुद से ख़ुद की मैं
पहचान करा जाऊं,
ऐ यारा...! बस कर दे
इतना सा करम,
बिखर कर खुद
मैं तुझमे समा जाऊं...
#SwetaBarnwal
ख़ुद को कभी बांध पाऊं,
जो चाहूं कभी लिखना
कुछ अपने बारे में,
उनको कागज पर
मैं उतार पाऊं,
कोई अपना हो कर भी
अपना नहीं है,
कोई कुछ ना हो कर भी
सबकुछ लगता है,
जी चाहता है अब
तोड़ दूँ सारी हदें
उड़ जाऊं इस कैद से
छू लूँ ऊंचे आसमां को,
गर एक साथ जो तेरा
मिल जाए मुझको
ख़ुद से ख़ुद की मैं
पहचान करा जाऊं,
ऐ यारा...! बस कर दे
इतना सा करम,
बिखर कर खुद
मैं तुझमे समा जाऊं...
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