Sunday, 28 October 2018

ये तुम्हारी आँखें...

ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोलती है तुम्हारी आँखें,
मन में मयूर सा डोलता है मेरे देख कर ये तुम्हारी आँखें,
स्वप्न सुंदरी हो तुम कोई या हो कोई स्वर्ग की अप्सरा सी,
एक नशा सा छा जाता है मन मे देख कर तुम्हारी आँखें,

कभी छलकती है कभी बरसती है ये तुम्हारी आँखें
ना जाने ख़ामोशी से क्या कुछ पाने को तरसती है ये आँखें
कभी कोई सुमधुर संगीत है, कभी किसी शायर की ग़ज़ल
खिलता कमल है चेहरा तेरा, झील सी है ये तुम्हारी आँखें

सज़दे मे झुक जाऊँ जिसके ख़ुदा की शक्ल है तुम्हारी आँखें
सादगी से भरी है ये एक जादू सा छाया है इन आँखों में
उठे जो पलकें हो जाए सवेरा ये झुके तो छाए अंधियारी
ख़ुद उस ईश्वर की खूबसूरत अमानत है ये तुम्हारी आँखें...

ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोलती है तुम्हारी आँखें...
मन में मयूर सा डोलता है मेरे देख कर ये तुम्हारी आँखें,
स्वप्न सुंदरी हो तुम कोई या हो कोई स्वर्ग की अप्सरा सी,
एक नशा सा छा जाता है मन मे देख कर तुम्हारी आँखें...

#SwetaBarnwal





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