तेरी नज़रअंदाज़गी और बेरुखी ने ही सील दिये हैं होंठ मेरे,
अब तुम्हीं बताओ कैसे कहूँ कि तेरी बहुत याद आती है...!!
#SwetaBarnwal
अब तुम्हीं बताओ कैसे कहूँ कि तेरी बहुत याद आती है...!!
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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