Monday, 22 October 2018

मन नहीं करता...

ज़िन्दगी क्या थी अब क्या हो गई,
जो चाहा वो कभी पाया नहीं
और जो पाया उसे चाहना आया नहीं,
अब तो और कुछ पाने का मन नहीं करता,

रोते रोते हंस दिया करते थे कभी
अब तो मुस्कुराने का भी मन नहीं करता,

लुटाई थी जिसकी चाहत में हर आरज़ू
अब तो उसे भी चाहने का मन नहीं करता,

क्या क्या ना ख्वाब सजाए थे आँखों ने
अब उन ख्वाबों को देखने का भी मन नहीं करता,

हर आहट पे चौंक उठते थे कभी
अब तो बस पथराई सी आँखें हैं
ना जाने शून्य में किसकी तलाश है
अब और किसी से दिल लगाने का मन नहीं करता,

तेरी चाहत में इस कदर मगरूर हो गए हम
अब किसी और को अपना बनाने का मन नहीं करता,

जाओ जी लो तुम अपनी ज़िंदगी यारा
हमे तो अब और जीने का भी मन नहीं करता...

#SwetaBarnwal

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