Monday, 15 October 2018

चाहती हूँ बस...

चाहती हूँ बस मैं तेरे दिल में मेरा ही डेरा हो,
हर पल हर शय बस तू मेरी ही यादों से घिरा हो,

गर तू चाँद है तो तेरी चांदनी सिर्फ़ मुझपे बरसे,
गर तू सूरज है तो तेरी हर धूप सिर्फ़ मुझपे खिले,

चाहती हूँ बस तारों भरी रात हो और तु मेरे साथ हो,
हर पल तू मुझे निहारे, तेरी आँखों में मेरे ही ख्वाब हो,

चाहती हूँ तेरी किस्मत मैं संवारना तुझे दिल में बसाना,
तेरे हाथों में मोहब्बत की लकीरों में नाम सिर्फ़ मेरा हो,

चाहती हूँ बस तेरे साथ मेरी ज़िंदगी की हर शाम गुज़रे,
हर लम्हा हर आरज़ू तेरी ज़िंदगी का कुर्बान बस मुझपे हो,

मैं फूल बन खिलती रहूँ तुम खुशबु बन महकते रहो,
चाहती हूँ बस हर जनम तुम मेरे ही दामन से उलझते रहो,

तेरी हर सुबह मुझसे हो तेरी हर शाम मुझपे ही ढले,
चाहती हूँ बस तेरी ज़िंदगी सिर्फ़ मेरी पनाहों में ही गुज़रे ...

#SwetaBarnwal







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