Friday, 19 October 2018

भागम भाग...

हम भी भाग रहे हैं  तुम भी भाग रहे हो, 
हर आदमी यहां देखो ख़ुद से भाग रहा है,
कोई यहां पैसे के पीछे भाग रहा है
तो कोई शोहरत के पीछे भाग रहा है
कोई यादों से भाग रहा है तो कोई वादों से,
कोई बातों से भाग रहा है तो कोई इरादों से,
कोई सच से भाग रहा है तो कोई झूठ से,
कोई ज़िंदगी से भाग रहा है तो कोई मौत से,
कोई अपनों से भाग रहा है तो कोई अपने आप से,
ना जाने कैसी ये प्यास है किससे लगाया सबने रेस है,
पर इतना तो तय है कि यहां सब भाग रहे हैं,
आगे बढ़ने की चाह में ख़ुद से पीछे रह गए हैं,
ना जाने हम सब क्या से क्या हो गए हैं...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...