Saturday, 27 April 2019

क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

जिस आंगन में बचपन बीता
उसे छोड़ एकपल में तेरे घर को अपना लिया
जो अपना था वो अब अपना रहा नहीं
और बेगाने अब हमारी तकदीर हो गए
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

अपने माँ बाबा की लाडली थी मैं जान
मेरी हर गलती को हंस कर नज़रअंदाज़ कर देते थे
आज छोटी सी गलती हो जाए तो
मेरे पूरे खानदान को गाली दे दी जाती है
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

मांग मे सिंदूर क्या पड़ गए
एक पल मे ही सारे रिश्ते बदल गए
मैं बेटी से बहु बन गई
जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गई
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

तुम मुझे अपने कमरे में भेज घंटों
अपने परिवार वालों के साथ वक़्त बिताते हो
मैं नहीं कहती कि तुम सब मेरी शिकायतें करते हो
पर क्या उन लम्हों में मैं शामिल नहीं हो सकती थी
अब मैं भी तो तुम्हारे परिवार का हिस्सा थी जान
फ़िर क्यूँ मुझसे ऐसा परायापन
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

तुम्हारा घर, तुम्हारा परिवार, तुम्हारे दोस्त तुम्हारी ज़िंदगी
जैसे कल चल रही थी आज भी वैसी ही है
पर मेरा क्या, मुझसे तो मेरी पहचान भी छीन गई
और जो कभी मैं अपनी माँ से थोड़ी देर बात कर लूँ
तो ऐसा लगता है जैसे कोई गुनाह हो गया हो
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

आज तक मेरे माँ बाबा ने मुझ पर उंगली नहीं उठाई
ना ही कभी अभद्र शब्दों के बाण चलाए मुझ पर
लाखों मे एक थी उनकी बेटी, गुणों की खान
पर ससुराल आते ही ऐसा क्या बदल गया मुझमे
कि रोज हर बात के लिए आलोचनाएं मिलने लगी
मेरे चरित्र पर किचड़ उछाले जाने लगे
मेरे कोमल मन को बारबार लहूलुहान किया जाने लगा
और तुम उस वक़्त भी मुकदर्शक बन खड़े रहे
यही फर्ज़ है होता है एक पति का अपनी पत्नी के लिए
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

हर कदम साथ निभाने का वादा किया था तुमने
पर जब भी जरूरत पड़ी ख़ुद को तन्हा ही पाया
तेरे हर मुश्किलों मे तेरा हौसला बढ़ाया हमने
ख़ुद से भी ज्यादा ऐतबार किया था हमने तुम पर
पर तुम से वो साथ और भरोसा कभी ना पा सकी
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

अपनी ही शर्तों पे ज़िन्दगी जीने की आदत थी मुझे
मस्त बिंदास और बच्चों जैसी हरकतें थी मेरी
फ़िर भी तेरे लिए ख़ुद को पल में बदल डाला
तेरी ख़ुशी मे ही ख़ुद की ख़ुशी तलाशने लगी थी
बावज़ूद इसके तेरे संग दो पल को मैं तरसती रही
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

बेटी नहीं बेटा बना कर पाला था मेरे बाबा ने मुझे
तुम अगर अपने बीमार माँ बाप की सेवा करो तो फर्ज़
और जो मैं करना चाहूं तो मेरे पैरों में बेड़ियाँ
तुम्हारी बहन मायके में महीनों बिताए तो उसका हक
और जो मैं कुछ दिनों के लिए मायके चली जाऊँ
अपने जरूरतमंद माँ बाप की सेवा करने या मन बहलाने
तो जमाने भर के ताने और मेरे संस्कारों को गालियाँ
क्या इस दर्द को समझ सकता है कोई....

#SwetaBarnwal


Thursday, 25 April 2019

तो क्या बात हो...

किताबों के पन्नो को पलट कर सोचती हूँ
यूँ ही पलट जाए ज़िंदगी तो क्या बात हो
हाथों में मेरे रख दे जो वो हाथ मेरे
तो क्या बात हो
दो कदम चल ले जो वो साथ मेरे
तो क्या बात हो
प्यार से जो वो रख दे सर पे हाथ मेरे
तो क्या बात हो
रोते चेहरे पर जो ला दे कोई हंसी
तो क्या बात हो
जब से चाहा तुझे कुछ और ना चाहा कभी
ज़िन्दगी में जो कभी तू मिल जाए
तो क्या बात हो
यूँ ही चुटकी मे सुलझ जाए हर मुश्किल
तो क्या बात हो
लड़ने से किसी को कुछ ना हासिल हुआ कभी
यूँ बातों ही बातों में उलझने सुलझ जाए
तो क्या बात हो...

#SwetaBarnwal 

Thursday, 7 March 2019

कब तक खुद को रोक पाएंगे वो
बिना हमारे एक पल भी जी ना पाएंगे वो
बस जाएँगे यादों मे उनके कुछ इस तरह से हम
फिर खुद को भी याद करना भूल जाएंगे वो...

#SwetaBarnwal

भारत देश


नहीं होगा अब कोई भी समझौता
ना होगी अब कोई वार्तालाप
नज़र जो कोई उठी अब भारत की ओर
बस मस्तक अब वो कटेगा
कई मुसीबतों और कुर्बानियों से
मिली हमे ये आज़ादी है
अपने प्राणों से भी प्रिये हमे है
अपने मुल्क की आज़ादी है
इसे मिटाने की साजिश रचने वाले
अब हमने भी चुप्पी तोड़ी है
देश धर्म की रक्षा के ख़ातिर
आतंकवाद की गर्दन मरोडी है
बंद करो अब ये नरसंहार
अब ना सहेंगे तेरा कोई भी वार
धमकी और आतंकवाद से
भारत का भाल झुका लोगे
यह मत समझो
गद्दारों की टोली लेकर
कश्मीर कभी हथिया लोगे
यह मत समझो
जब तक धरती अंबर होंगे
सूरज मे जब तक तेज रहेगा
जब तक गंगा की धार रहेगी
भारत का वर्चस्व बना रहेगा

#SwetaBarnwal 

निःस्वार्थ चाहत

बेहद बेइंतहा बेपनाह चाहते हैं हम तुम्हें
तुम्हें चाहने की कोई वजह नहीं
तुझको चाहूँ तुझको ही पुजूं
तुझे दिल में बसाने की कोई वजह नहीं
कई हसरतें हैं दिल में तुझको लेकर
मुकम्मल हो जाए, ऐसा मुमकिन नहीं
तुझसे मोहब्बत है कह दूँ जमाने से
मगर कुछ और खोने की अब हसरत नहीं
मिल जाए गर साथ तेरा ज़िंदगी रौनक हो जाए
वर्ना तो इसमे रंग अब कोई बाकि नहीं...

#SwetaBarnwal 

Saturday, 2 March 2019

भारत की सेना के आगे
हर तूफ़ान ने बाजी हारी है
फौलादी हैं सीने इनके
और चट्टानी इरादे हैं
भारत माँ की रक्षा ख़ातिर
हर बाजी इसने मारी है...

#SwetaBarnwal 

अभिनंदन...

वंदन है अभिनंदन तेरा
तु मातृभूमि का नंदन है
काल है तू दुश्मनों का
तु स्वयं महाकाल का अवतारी है
धूल चटा आया दुश्मनों को तु
मौत भी तुझसे हारी है...

#SwetaBarnwal

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...