Saturday, 4 August 2018

सबसे कही तुमने 
सबकी सुनी तुमने, 
काश..! 
कुछ हमारी भी सुन जाते, 
और 
कुछ अपनी भी सुना जाते...

#SwetaBarnwal 

Friday, 27 July 2018

कितने बारिश और धूप
आए और चले गए,
पर जिसका इंतजार था
वो अब तक नहीं आए...

#SwetaBarnwal

बंटवारा...

कभी-कभी ये सोच मैं हो जाती हूँ हैरान,
कैसा होता हिंदुस्तान
गर बंटवारे के बाद सारे मुसलमान
चले जाते पाकिस्तान...

ना धर्म की लड़ाई होती,
ना मुस्लिम वोट बैंक का झगड़ा,
चारों तरफ अमन और शांति होती,
ना होता कोई भी लफड़ा...

एक ही धर्म का होता बोलबाला,
चाहे हो कोई गली या मोहल्ला,
ना कोई बाबरी मस्जिद होता,
ना होता कभी मंदिरों पे हमला...

पुर सुकून की ज़िंदगी होती,
हर ओर होता चैन-ओ-अमन,
देश का बंटवारा तो हो गया था #श्वेता,
गांधी जी ने देश का किया ये कैसा दमन...

#SwetaBarnwal
तन्हाइयों की आदत ना थी हमे,
महफिलों के हम भी शौकीन हुआ करते थे,
ये खामोशियाँ तो उनका दिया तोहफ़ा है,
जिन्हें हम कभी दिल-ओ-जान से चाहा करते थे...

#SwetaBarnwal

Thursday, 26 July 2018

हमने कलम उठाया 
और अपने जज़्बातों को 
अल्फाज़ों का रूप दे दिया 
और भेज दिया उनको 
पर जो जज़्बात ना समझ पाए 
वो मेरे अल्फाज़ क्या समझेंगे... 

#SwetaBarnwal 

इंतज़ार की आदत अब रही नहीं,
ख्वाहिशें राहों में कहीं खो गई है,
अब ना शिकवा है कोई, 
और ना शिकायत है उनसे,
अगर कुछ है... तो मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हमें हो गई है...

#SwetaBarnwal

अपना भारत...

अब लद गए वो दिन #श्वेता
जब ऐसा अपना हिंदुस्तान था...

अमन और शांति फैली थी हर ओर 
जहाँ ना कोई हिंदू, ना मुसलमान था...

राम प्रसाद बिस्मिल्ल आदर्श थे तो 
अशफ़ाक उल्ला खां देश की जान थे...

भारत माता की दुनिया में अलग पहचान थी,
हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई ये चारों इसकी संतान थे... 

अब तो चारों ओर बस आतंकवाद का डेरा है, 
गरीबी, बेरोजगारी और बेहाली ने सबको घेरा है... 

कभी राजनीति के नाम पर दंगे होते हैं,
तो कहीं दंगो और लाशों की राजनीति होती है...

विश्वगुरु कहा जाने वाला अपना भारत 
आज ख़ुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है...


#SwetaBarnwal 

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...