Saturday, 7 March 2020

बस एक दिन मे ना बांधों तुम नारी के सम्मान को,

गर दे सकते हो तो दे दो पंख उनके स्वाभिमान को...

महिला दिवस के एक दिन के लिए जो है वंदनीय,

भला क्यूँ रहे वो 364 दिन निंदनीय...

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

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