हम तो खुशबु हैं जनाब,
हवाओं से उलझना फितरत है हमारी...
बिखरने का डर फूलों को होगा,
बिखर कर निखरने की आदत है हमारी...
#SwetaBarnwal
हवाओं से उलझना फितरत है हमारी...
बिखरने का डर फूलों को होगा,
बिखर कर निखरने की आदत है हमारी...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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