तोड़ के हर दर-ओ-दिवार,
एक दिन मैं उड़ जाउंगी,
इस दुनिया से दूर कहीं
एक नया जहां बनाऊँगी,
लाख लगा लो पहरे मुझपर,
आसमाँ को छू कर मैं दिखलाउंगी,
तोड़ के सारे बंधन मैं
फुर्र से उड़ जाउंगी,
बांध दो ईन पैरों में चाहे
रस्मों रिवाज की जंजीरें,
बदल के तेरी दुनिया मैं
नया इतिहास रचाउंगी,
अपनी मेहनत और हिम्मत से,
अपनी पहचान बनाऊँगी,
जो नहीं हुआ है पहले कभी,
वो करके मैं दिखलाउंगी,
लड़की हूँ कोई बोझ नहीं,
ये सबको अब समझाउंगी,
खड़ी कर दो चाहे कितनी भी ऊंची
परंपराओं की दिवार तुम,
या बिछा दो कितने भी कांटे
मेरी राहों में तुम,
नौ महिने कोख में रख कर तुझको
जो दे सकती है जीने का अधिकार तुझे,
फ़िर सोचो ग़र आ जाए वो ज़िद पर अपने
क्या नहीं फ़िर कर सकती है वो,
नारी हूँ मैं कोई श्राप नहीं,
छीने कोई हक़ मेरा
ये किसी को अधिकार नहीं...
#SwetaBarnwal
एक दिन मैं उड़ जाउंगी,
इस दुनिया से दूर कहीं
एक नया जहां बनाऊँगी,
लाख लगा लो पहरे मुझपर,
आसमाँ को छू कर मैं दिखलाउंगी,
तोड़ के सारे बंधन मैं
फुर्र से उड़ जाउंगी,
बांध दो ईन पैरों में चाहे
रस्मों रिवाज की जंजीरें,
बदल के तेरी दुनिया मैं
नया इतिहास रचाउंगी,
अपनी मेहनत और हिम्मत से,
अपनी पहचान बनाऊँगी,
जो नहीं हुआ है पहले कभी,
वो करके मैं दिखलाउंगी,
लड़की हूँ कोई बोझ नहीं,
ये सबको अब समझाउंगी,
खड़ी कर दो चाहे कितनी भी ऊंची
परंपराओं की दिवार तुम,
या बिछा दो कितने भी कांटे
मेरी राहों में तुम,
नौ महिने कोख में रख कर तुझको
जो दे सकती है जीने का अधिकार तुझे,
फ़िर सोचो ग़र आ जाए वो ज़िद पर अपने
क्या नहीं फ़िर कर सकती है वो,
नारी हूँ मैं कोई श्राप नहीं,
छीने कोई हक़ मेरा
ये किसी को अधिकार नहीं...
#SwetaBarnwal
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