बेटे की तरह बेटी भी
नौ महीने माँ की कोख में पलते हैं
बेटे की तरह बेटी भी
बाबा की उंगली थाम के चलते हैं,
होती है दोनों की सूरत एक जैसी
होती है दोनों ही मुरत एक जैसी,
बेटे की तरह बेटी भी
माँ की गोद में सोते हैं,
बेटे की तरह बेटी भी
हंसते गाते और रोते हैं,
करते नादानियाँ दोनों एक जैसी
करते मनमानियाँ दोनों एक जैसी,
बेटे की तरह बेटी भी
नाम रौशन करती हैं,
बेटे की तरह बेटी भी
कुल का मान रखती है,
करते अठखेलियाँ दोनों एक जैसी
करते शैतानियाँ दोनों एक जैसी,
बेटा पिता का साया है
तो बेटी माँ की परछाई है,
भला माँ बाप की सेवा में
बेटी कब पीछे आई है,
बेटा अगर गुमान है
तो बेटी भी स्वाभिमान है,
फ़िर भी क्यूँ नहीं होती है
दोनों की किस्मत एक जैसी,
फ़िर भी क्यूँ कोख में ही
खत्म कर दी जाती है इसकी कहानी,.
क्यूँ बेटी के जन्म का मातम मनाते हैं लोग,
क्यूँ उसे बोझ समझ दूर फेंक देते हैं लोग.
बेटा ग़र मान है तो बेटी कौन सा अपमान है,
क्यूँ नहीं समाज देता इन्हें इज्ज़त समान है...
#SwetaBarnwal
नौ महीने माँ की कोख में पलते हैं
बेटे की तरह बेटी भी
बाबा की उंगली थाम के चलते हैं,
होती है दोनों की सूरत एक जैसी
होती है दोनों ही मुरत एक जैसी,
बेटे की तरह बेटी भी
माँ की गोद में सोते हैं,
बेटे की तरह बेटी भी
हंसते गाते और रोते हैं,
करते नादानियाँ दोनों एक जैसी
करते मनमानियाँ दोनों एक जैसी,
बेटे की तरह बेटी भी
नाम रौशन करती हैं,
बेटे की तरह बेटी भी
कुल का मान रखती है,
करते अठखेलियाँ दोनों एक जैसी
करते शैतानियाँ दोनों एक जैसी,
बेटा पिता का साया है
तो बेटी माँ की परछाई है,
भला माँ बाप की सेवा में
बेटी कब पीछे आई है,
बेटा अगर गुमान है
तो बेटी भी स्वाभिमान है,
फ़िर भी क्यूँ नहीं होती है
दोनों की किस्मत एक जैसी,
फ़िर भी क्यूँ कोख में ही
खत्म कर दी जाती है इसकी कहानी,.
क्यूँ बेटी के जन्म का मातम मनाते हैं लोग,
क्यूँ उसे बोझ समझ दूर फेंक देते हैं लोग.
बेटा ग़र मान है तो बेटी कौन सा अपमान है,
क्यूँ नहीं समाज देता इन्हें इज्ज़त समान है...
#SwetaBarnwal
No comments:
Post a Comment