Tuesday, 4 June 2019

नानी...

माँ की माँ होती है नानी
बड़ी ही प्यारी बड़ी सयानी
सीने से लगाती है नानी
खुब लाड़ लड़ाती है नानी
माँ की मार से बचाती है
कहानी रोज सुनाती है नानी
दूध मलाई खुब खिलाती है
मीठी लोरी हमे सुनाती है
चेहरे पर इनके रौनक रहती
मुँह में अमृत वाणी है
हर गुण उनमे भरा हुआ
मेरे हिस्से आई वो जैसे
ख़ुदा की कोई मेहरबानी है
जब भी जाते हैं हम घर उनके
जहाँ का प्यार लुटाती वो
बना कर स्वादिष्ट व्यंजन
जी भर कर हमे खिलाती है
संयम, हिम्मत, प्यार और विश्वास
ये सब हमें सिखाती है
अपनी खट्टी मीठी बातों से
हम सबको खुब हंसाती है
हर बात की है समझ उनको
देश दुनिया का है ज्ञान उन्हें
नानी माँ के किस्से और नुस्खे
दुनिया भर में धूम मचाये
घर की वैध,
जड़ी-बूटी की जानकार है नानी
संस्कारों की खान है नानी
हरकतें उनकी है बचकानी
माँ की माँ होती है नानी
बड़ी ही प्यारी बड़ी सयानी


#SwetaBarnwal

Saturday, 1 June 2019

जो रिश्ते बारिश की पहली बूंद मे ही धुल जाए
ज़िन्दगी भर ढोने से बेहतर है हम उन्हें भूल जाए...

#SwetaBarnwal 

Friday, 31 May 2019

एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...

एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी
देश रक्षा के ख़ातिर गद्दारों पे वार करेगी

वीरों का जयनाद करेगी जीत पर अभिमान करेगी
दुश्मनों का अंत करेगी फ़िर जाकर आराम करेगी
जयचन्दों का वध करेगी काली बन संहार करेगी
मिट्टी से अपने प्रेम करेगी क्रांति का उद्घोष करेगी
एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...

नारी का सम्मान करेगी निर्बल का संबल बनेगी
शोषित की आवाज़ बनेगी शोषण का प्रतिकार करेगी
घर में भेदी छुपे हुए जो उनका वो संहार करेगी
चले कभी जो कलम मेरी तो धरती और आकाश हिले
एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...

शेरों का हुंकार बनेगी आज़ादी की तलवार बनेगी
युद्ध का शंखनाद बनेगी लहू बन नस नस में दौड़ेगी
दुर्बल को ये बल देगी सबको ऐसा वो कल देगी
अपने वतन से सबको प्रेम करना वो सिखा देगी
एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...

निर्धन को ये धन देगी शासक को ये सद्गुण देगी
सुख और शांति से भरा बच्चों को आने वाला कल देगी
दुष्टों का ये नाश करेगी अग्नि का ऐसा प्रहार करेगी
शत्रु थर थर काँपे डर से विष की ऐसी फूंकार भरेगी
एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...

हिंद भी सिंहनाद करेगा भारत माँ का जयनाद करेगा
लहर दौड़ा दे जो शांत सिंध पे ऐसा वो ज्वार बनेगा
अधर्मी पर ये वार करेगा धर्म का  प्रचार करेगी
चीर निद्रा को ये भंग करेगा युवाओं को तैयार करेगी
एक दिन कलम मेरी तलवार बनेगी...


#SwetaBarnwal



कलम... ✍️

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

करेगी वीरों की जयकार
लिखूंगी आज कुछ ऐसा
जगा दे जोश रग रग में
बहा दे देश प्रेम की गंगा

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

सच को सच लिखूंगी आज
कहूँगी झूठ को मैं झूठ
घोर अंधेरों में उम्मीदों की
आशाएँ नई मैं खोलूंगी

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

मेरी कलम नहीं छोड़ेगी
हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई
मेरी कलम आज लिखेगी
मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा
देशभक्तों की ढाल बनेगी
और गद्दारों पर वार करेगी

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

देश रक्षा की ख़ातिर मैं
यलगार लिखा करती हूँ
ऐसी हालत देख देश की
सारी रात जगा करती हूँ

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

नींद नहीं आती है मुझको
मैं दिन रात ये सोचा करती हूँ
पड़ी जरूरत देश को तो मैं
कलम छोड़ तलवार उठा सकती हूँ

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

भगा सकूँ दुख दर्द देश का
मैं बातों में ललकार भरा करती हूँ
शब्दों से कोई छेड़छाड़ नहीं
मैं उसमें आग भरा करती हूँ

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

अपनी बातों से फूल नहीं
मैं बम और गोले दागा करती हूँ
कलम की ताकत से इस देश की
मैं तख्तो ताज़ पलट सकती हूँ

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

सेंक रहे जो राजनीति की रोटियां
उन्हें सिखा दे सबक कुछ ऐसा
भुला कर हर भेद दिल से
करे वो सच्चा प्रेम देश से

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

बड़ी गज़ब की ताकत है
इस कलम मे
ये रंक को राजा और
राजा को रंक बना सकती है
इसी कलम की ताकत से
गीता और पुराण हैं
इसी कलम ने दिया जहां मे
ज्ञान और विज्ञान है
इसी कलम से आज मैं
अंतर्मन का द्वंद लिखूंगी
वीरों की हुंकार लिखूंगी
तलवारों की झंकार लिखूंगी
गीत ग़ज़ल नव छन्द लिखूंगी
मातृभूमि का प्यार लिखूंगी
शहीदों का बलिदान लिखूंगी

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...

माँ सरस्वती की संतान
मातृभूमि की सेवक मैं
अपना तन मन और सर्वस्व
इस मिट्टी पे कर दूँ अर्पण
मेरी कविता का हर शब्द
कण कण मे क्रांति घोल रहा
देश का बच्चा बच्चा आज
जय हिंद जय हिंद बोल रहा

जो मेरी कलम उठेगी
आज़ादी की हुंकार भरेगी...


#SwetaBarnwal




Thursday, 30 May 2019

भगवा, हिन्दुत्व की पहचान... 🚩

जिस दिन भारत के घर घर में फ़िर से भगवा लहराएगा
उस दिन अपना देश फ़िर से हिंदुस्तान कहलाएगा
जिस दिन सुभाष और आज़ाद के सपनों को परवान मिलेगा
उस दिन अपना भारत फ़िर से विश्वगुरु बन जाएगा
हिंदू धर्म में जन्म लेकर जिसे हिन्दुत्व से प्यार नहीं
उसको हिंदुस्तान की सरजमीं पर रहने का अधिकार नहीं
हिंदू घर में जन्म लेकर जो करता भगवा से प्यार नहीं
ऐसे गद्दारों को यहाँ जीने का भी अधिकार नहीं
राम और कृष्ण की भूमि पर जिसे गीता का ज्ञान नहीं
राणा प्रताप का वंशज होकर जिसे भगवा की पहचान नहीं
हिंदू कुल मे जन्म लेकर जो करता भगवा का सम्मान नहीं
ऐसे देशद्रोहियों को भारत में रहने का अधिकार नहीं
ओ गांधी जो तूने अपने तन पर भगवा को सजाया होता
छोड़ कर गंदी राजनीति जो भगत सिंह को बचाया होता
नेहरू का पक्षपात ना करता पटेल का राजतिलक होता
भारत के ना टुकड़े होते ना ट्रेनों में लाशें भर कर आते
गैरों को खुश करने मे तूने देश को ना बांटा होता
गर भगवा को तूने समझा होता
गोडसे ने तुमको ना ठोंका होता
ऐ गांधी तब तु कुछ और साल जिया होता
भगवा बस एक रंग नही है ये किस्सा है कुर्बानी का
जिसने इसको समझ लिया वो लाल है माँ भवानी का
गोल मोल ये बात छोड़ कर मैं सच कहने की आदि हूँ
भारत माँ की वीर सपूत मैं कट्टर हिन्दूवादी हूँ


#SwetaBarnwal 

भगवा... 🚩🙏🏼

भारत माँ की शान है भगवा
हिन्दुत्व की पहचान है भगवा
सूरज की पहली किरण है भगवा
संझा की लाली है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

इस धरती की मिट्टी है भगवा
सिक्खों का ताज है भगवा
ऋषि मुनि का तप है भगवा
साधु संतों का शृंगार है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

माँ भारती का आँचल भगवा
वीर शहीदों का लहू है भगवा
अग्नि का तेज है भगवा
सनातन धर्म का आधार है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

राणा प्रताप का तेज़ है भगवा
वीर शिवा की जान है भगवा
लक्ष्मी बाई का अभिमान है भगवा
जौहर का ये रंग है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

हर हिंदू की पहचान है भगवा
गीता और पुराण है भगवा
त्याग और तप की गाथा है भगवा
गंगा जल सा पावन है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

देश पे कुर्बान होने का जुनून है भगवा
रगों में देश प्रेम बन दौड़ने वाला लहू है भगवा
बच्चों की किलकार है भगवा
माता का दुलार है भगवा
कुछ भी कह लो इस को तुम
पर कभी भगवा आतंकवाद ना कहना

#SwetaBarnwal




नमो नमो... 🙏🏼

तेरे जयनाद से
जीत के उद्घोष से
हिल उठी धरा
गूंज उठा गगन
तेरा ही जय हो
तेरा विजय हो
हिन्दुत्व की तु आस है
धर्म का तु प्रकाश है
सिंह की दहाड़ तु
मिट्टी की पुकार तु
जीत की मशाल तु
हिंद की आवाज़ तु
आग की धधक है तु
फ़ूलों की महक है तु
भुजाओं का बल है तु
हिंदुस्तान का कल है तु
रुके ना तु झुके ना तु
थके ना तु थमे ना तु
मुड़े ना तु गिरे ना तु
सदा चले बिना थके
हिंद का ख्वाब है तु
दुश्मनों का जवाब तु
जीत का तिलक है तु
गद्दारों की मौत तु

#SwetaBarnwal

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...