Sunday, 2 December 2018

बेवजह रूठ जाने को दिल करता है
तुम आओ मनाने ऐसी चाहत रखता है...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...