शायद 3 साल की उम्र थी मेरी
जब पहली बार विद्यालय गई
सरस्वती शिशु मंदिर का वो प्रांगण
विध्या का था वो आँगन
गांव का वो छोटा सा विद्यालय
मानो माँ सरस्वती का हो आलय
किसी ने प्यार से मुझे गोद उठाया
माँ बाबा की ममता सा अहसास दिया
पहली बार आचार्य को मैंने जाना
उनके संरक्षण में खुद को महफूज़ माना
ज्ञान का प्रकाश उनसे पाया,
हर कदम पर रहे वो बन हम साया,
#SwetaBarnwal
जब पहली बार विद्यालय गई
सरस्वती शिशु मंदिर का वो प्रांगण
विध्या का था वो आँगन
गांव का वो छोटा सा विद्यालय
मानो माँ सरस्वती का हो आलय
किसी ने प्यार से मुझे गोद उठाया
माँ बाबा की ममता सा अहसास दिया
पहली बार आचार्य को मैंने जाना
उनके संरक्षण में खुद को महफूज़ माना
ज्ञान का प्रकाश उनसे पाया,
हर कदम पर रहे वो बन हम साया,
#SwetaBarnwal
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