लिख तो दूं किताबें हमारी मासूमियत पर फिर डर लगता है,
कहीं इस जहाँ में हमारा जीना दुश्वार ना हो जाये...
#SwetaBarnwal
कहीं इस जहाँ में हमारा जीना दुश्वार ना हो जाये...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
No comments:
Post a Comment