याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
वो माँ की गोद वो पिता का दुलार
वो भाई बहन से लड़ना झगड़ना
वो हंसी ठिठोली वो रूठना मनाना
दोस्तों की टोली मिलकर धूम मचाना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
वो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाना
रात को राजा रानी और पारियों की कहानी
माँ की मार से बच दादी की गोद में छुपना
भूत प्रेत के डर से राम नाम जपना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
खेल खेल में ज़िंदगी के गुर सीख लेते थे
खुब गिरते थे फ़िर भी कभी ना रुकते थे
माँ की साड़ी पहन दुल्हन बन जाना
ख़ुद को आईने मे सौ बार निहारना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
कू कू कर कोयल को चिढ़ाते थे
थक जाते थे पर हार ना मानते थे
आम के पेड़ों पर वो झूला झूलना
गर्मी की दुपहरी में भी दौड़ लगाना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
रात को खुले आसमां के नीचे सब एक साथ सोते थे
कभी टूटते तारे को देखते थे तो कभी मुराद मांगते थे
उड़ते हवाई जहाज की रोशनी के साथ सपनों मे खोना
कभी जुगनूओं के पीछे भागना कभी उसे मुट्ठी में बांधना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
याद आती है बहुत वो गुड्डे गुड़िया की शादी
वो पल वो ज़िंदगी वो आसमान में उड़ने की आज़ादी
वो गिल्ली डंडा वो चूड़ी, कंचे, गोटी की तीज़ोरी
सीख लेते थे लूडो से ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव
वो चढ़ना गिरना फ़िर गिर के संभलना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
#SwetaBarnwal
वो माँ की गोद वो पिता का दुलार
वो भाई बहन से लड़ना झगड़ना
वो हंसी ठिठोली वो रूठना मनाना
दोस्तों की टोली मिलकर धूम मचाना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
वो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाना
रात को राजा रानी और पारियों की कहानी
माँ की मार से बच दादी की गोद में छुपना
भूत प्रेत के डर से राम नाम जपना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
खेल खेल में ज़िंदगी के गुर सीख लेते थे
खुब गिरते थे फ़िर भी कभी ना रुकते थे
माँ की साड़ी पहन दुल्हन बन जाना
ख़ुद को आईने मे सौ बार निहारना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
कू कू कर कोयल को चिढ़ाते थे
थक जाते थे पर हार ना मानते थे
आम के पेड़ों पर वो झूला झूलना
गर्मी की दुपहरी में भी दौड़ लगाना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
रात को खुले आसमां के नीचे सब एक साथ सोते थे
कभी टूटते तारे को देखते थे तो कभी मुराद मांगते थे
उड़ते हवाई जहाज की रोशनी के साथ सपनों मे खोना
कभी जुगनूओं के पीछे भागना कभी उसे मुट्ठी में बांधना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
याद आती है बहुत वो गुड्डे गुड़िया की शादी
वो पल वो ज़िंदगी वो आसमान में उड़ने की आज़ादी
वो गिल्ली डंडा वो चूड़ी, कंचे, गोटी की तीज़ोरी
सीख लेते थे लूडो से ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव
वो चढ़ना गिरना फ़िर गिर के संभलना
याद आता है बहुत अपना वो प्यारा सा बचपन
#SwetaBarnwal
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