Saturday, 6 July 2019

वहम...

ये तुम थे या फिर मुझे कोई वहम हुआ
यूँ लगा जैसे आज फ़िर तूने मुझे छुआ...

आज फ़िर लगा जैसे इन सर्द हवाओं के साथ
कोई छू कर गुज़रा हो मुझे अभी अभी
ये एहसास लगा कुछ जाना पहचाना सा
यादों में रहता था जिसका आना जाना

ये तुम थे या फिर मुझे कोई वहम हुआ

ये हवा कोई खूबसूरत धुन सुना गई ऐसे
मधुर मिश्री सी घोल गई कानों में जैसे
मुद्दतों बाद आज फ़िर से वही मदहोशी छाई
लगता है जैसे फ़िर से खुशियाँ लौट आई

ये तुम थे या फिर मुझे कोई वहम हुआ
यूँ लगा जैसे आज फ़िर तूने मुझे छुआ...

मेरे दिल में कोई जादू सा जगा गया
तेरे होने का जैसे वो एहसास करा गया
कह दो अपने ख्यालों से यूँ ना मुझे तड़पाये
तेरी तरह वो भी मुझसे दूर चला जाए
अरसा हो गया तुम लौट कर कभी आए नही
और ये हवा हर बार तेरा ख़्याल ले आती है
आज भी खोई थी मैं अपनी ही उलझनों में
और ये हवा एकबार फिर वही प्यार के धुन सुना गई

ये तुम थे या फिर मुझे कोई वहम हुआ
यूँ लगा जैसे आज फ़िर तूने मुझे छुआ...

#SwetaBarnwal



No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...