Saturday, 20 July 2019

औरत...

बहुत जी लिया अबला बन कर
अब ना कोई अत्याचार सहुंगी
भर कर क्रोध की अग्नि इस सीने में
अब अपनी बातों से मैं अंगार भरूँगी
बंद करो ये कहना कि
महाभारत की वजह द्रौपदी थी
सच तो ये था कि
युधिष्ठिर की अय्याशी ने उसे लाचार किया
पांच पतियों की पत्नी हो कर भी
भरी सभा मे लुट रही थी वो
बहुत डाल लिए सच पर पर्दा
अब मैं सच्चाई की आवाज़ बनूंगी
लूटती आई है सदियों से ये औरतें
लक्ष्मी सरस्वती की इस धरा पर
द्रौपदी का चीरहरण लिखूंगी
बहुत सह लिया जुल्म ओ सितम
अब मेरी कलम हुंकार भरेगी
पुत्र की कामना मे कोख में मार डालते हैं पुत्री को
इस अन्याय के विरुद्ध
अब एक औज़ार बनूंगी
बेटियाँ घर से भाग जाती है तो
बाप की पगड़ी उछल जाती है
और जब बेटा
किसी के घर की इज़्ज़त लूट ले जाता है तो
ख़ामोश रह जाते हैं लोग
ऐसे दोगले समाज और न्याय के ठेकेदारों के लिए
एक सवाल बनूंगी
नही देनी अब कोई अग्नि परीक्षा
ना शतरंज पे बिछी बिसात बनूंगी
नहीं रहूंगी अब चुप ना ही अन्याय सहुंगी
पड़ी जरूरत अगर कभी तो
दुर्गा बन दुष्टों का संहार करूंगी...


#SwetaBarnwal 

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