Saturday, 6 July 2019

मत रो...

ऐ मन मत रो
ना कर आँसुओं को बर्बाद इस कदर
मान ले नियति जो भी मिला
मत कर कोई शिकवा गिला
ये वक़्त का दरिया है
बह जाएगा
कौन जाने कब कहां
जो छिना वो मिल जाएगा
या फिर कभी कहीं
कुछ मिल कर भी छिन जाएगा
ये वक़्त तो चलता जाएगा
तु हँसता जा या रोता जा
जीवन की बस यही रित है
कुछ मिल जाए
कभी छिन जाए
तु इसको हंस कर जीता जा
यही है राहें इस जग की
तु इसको गले लगाता जा
कब तक रोओगे रे पगले
कब तक अश्क बहाओगे
कब तक दुख का रोना रोकर
दिल को यूँ बहलाओगे
जो हुआ उसे तु भूल भी जा
बस आगे की सुध लेता जा
माना जीवन राहें वीरान थी तेरी
पर कब तक इसका शोक मनाएगा
तोड़ के सारे गम के बादल
ख़ुद को अंगार बनाता जा
कुछ भी नया नहीं तेरे लिए अब
इससे तू अब जूझ जरा, जूझ जरा
भर कर दिल में हौसला अपने
नई उम्मीदों के किरण संग चल
हो सकता है मिल जाए तुझे कोई नया जहां
तप कर और तपा ख़ुद को
बन कर फौलाद सह जा हर ताप
मत सोच जो आज ना मिला तुझे
वो कल भी ना मिलेगा तुझको
खोने पाने की आस में
ख़ुद को ना बर्बाद कर
जो है बस आज है
कल को किसने देखा है
जी ले तु इस पल को
ये पल ना लौट के आएगा कल
ना छोड़ कभी तु सुख की आस
ना जाने कब बुझ जाएगी
यूँ ही जीवन की शमा
कभी तो मिलेगा तुझको
एक खूबसूरत सा जहां
ऐ मन मत रो
ना कर आँसुओं को बर्बाद इस कदर...

#SwetaBarnwal





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