Monday, 28 February 2022

मैं नारी हूँ हर एक का बोझ उठाती हूँ...

मैं इस श्रृष्टि मे जीवन का आधार हूँ, 

मैं एक बेटी, बहन, माँ और पत्नी हूँ, 

मैं जीवन ज्योत बन जीवन को आलोकित करती हूं,

ख़ुद जलकर घर आँगन को रौशन करती हूँ,

मैं नारी हूँ हर एक का बोझ उठाती हूँ,


अपने अंदर मैं जीवन का अंश रखती हूँ,

दुनिया के संचार मे मैं एक अहम किरदार निभाती हूँ,

हुई जो कमी किसी मे भी बाँझ मैं ही कहलाती हूँ,

मैं नारी हूँ हर एक का बोझ उठाती हूँ...


तेरे कदम से कदम मिला कर चलती हूँ,

तेरी कामयाबी को अपना मुकद्दर समझती हूं,

पर कभी भूले से जो मैं आगे निकल जाऊँ,

तो सब की आंखों को चुभती हूँ,

मैं नारी हूँ हर एक का बोझ उठाती हूँ...


तुम्हारी हर बात सही हर रिश्ता जायज,

तुम्हारा परिवार, तुम्हारे दोस्त, तुम्हारी पसंद, 

सबको मन से या बेमन से, मैंने अपना बनाया, 

पर मेरा और मेरी खुशियों का क्या, 

मेरा किसी के साथ मुस्कुराना भी दुनिया को गवारा नहीं,

क्यूँ छन से टूट जाती है सब के विश्वास की दीवार,

क्यूँ मेरे सपने और खुशियाँ बोझ बन जाती है, 

मैं नारी हूँ, हर एक का बोझ उठाती हूँ...


#SWETABARNWAL 

Saturday, 26 February 2022

आज की स्त्री...

 क्यूँ बेबस और लाचार है,

क्यूँ सहमी और सकुचाई है,

क्यूँ सहती हर बात है,

क्यूँ उजड़े से तेरे हालात हैं 

आज की स्त्री...


क्यूँ होठों पर ख़ामोशी है,

क्यूँ चेहरे पर उदासी है,

क्यूँ जुल्मों को सहती है,

क्यूँ नहीं आवाज उठाती है,

आज की स्त्री...


क्यूँ तोड़ नहीं देती उन उंगलियों को,

जो चरित्र पे प्रश्न उठाते हैं,

जब कोई मन को छलता है,

क्यूँ प्रतिकार नहीं करती, 

आज की स्त्री...


ये वही धरा है जहां लक्ष्मीबाई ने हुंकार भरी,

रण चंडी बन दुष्टों का संहार किया,

ये वही धरा है जहां ख़ुद माँ दुर्गा ने काली का स्वरुप धरा,

फ़िर क्यूँ चुपचाप खड़ी है,

आज की स्त्री...


ये वही धरा है जहां लता मंगेशकर को स्वर कोकिला का सम्मान मिला,

ये वही धरा है जहां अहिल्या बाई होल्कर ने नारी उत्थान के लिए जंग लड़ा,

फ़िर क्यूँ भयभीत है,

आज भी स्त्री...


कर याद ईन वीरांगनाओं को,

प्रबल कर अपनी इक्षा शक्ति,

तोड़ दे हर जंजीरों को

और दिखा दुनिया को,

क्या कर सकती है,

आज की स्त्री...


#SWETABARNWAL 

Wednesday, 23 February 2022

 आरज़ू बस इतनी कि

उन्हें भी हमारी जुस्तजू हो,

करें जो याद हम उनको,

उन्हें भी ये महसूस हो..


#SWETABARNWAL

 ना किसी से कोई मोहब्बत ना जुस्तजू बाकी है,

जिंदा तो हैं मगर जीने की ना कोई आरज़ू बाकी है...


#SWETABARNWAL

 मुद्दत हो गई है कि ईन लबों पे हंसी आई नहीं,

हजार तूफ़ां आए कि आंख ये नम हुई नहीं,

विरान सी है ये ज़िंदगी कि इसमे कोई जुस्तज़ू नहीं,

जिए जा रहे हैं कि बस अब और कुछ पाने की आरज़ू नहीं...


#SWETABARNWAL

Sunday, 20 February 2022

चले आइए चाय पे....

 जब दिल करे आपका,

चले आइए चाय पे,


कुछ गुज़र गए हैं लम्हें,

उन्हें फिर से कैद कर लेंगे,

जी लेंगे फिर से उनको

जो मुट्ठी से फ़िसल गए हैं...


जब दिल करे आपका,

चले आइए चाय पे,


बातेँ कुछ अनकही कुछ अनसुनी सी,

रह गई थी जो दरमियाँ उसे आज कहेंगे,

आप शब्द बन जाना हम आवाज बनेंगे,

कुछ इस तरह हाल-ए-दिल बयां करेंगे,


जब दिल करे आपका,

चले आइए चाय पे,


आगे बढ़ने की होड़ में सब आगे निकल गए,

वक़्त की इस दौड़ में हम ज़रा पीछे ही रह गए,

ले आना साथ तुम अपने यादों की पोटली,

डाल जाना चंद लम्हे ख़ुशी के, कि खाली है मेरी झोली,


जब दिल करे आपका चले आइए चाय पे... 


#SWETABARNWAL



हमारा आज हमारे कल से बेहतर है,

 हमारा आज हमारे कल से बेहतर है,

क्यूंकि हम मे जीने का हुनर है... 


हमने हर मुश्किलों को ठोकर मारी,

मुस्करा कर किया हर मुसीबत का सामना,

अपने हौसलों को कभी हमने टूटने ना दिया,

टूटे अरमाँ मगर ख़ुद को कभी टूटने ना दिया,


हमारा आज हमारे कल से बेहतर है,

क्यूंकि हम मे जीने का हुनर है... 


कोई साथ दे ना दे हमने कदम आगे ही बढ़ाया,

मुह मोड़ गए सब पर कोई हमें तोड़ ना पाया,

अकेले चलती गई कभी पीछे मुड़ कर ना देखा,

टूटे सपने मगर ख़ुद को झुकने ना दिया,


हमारा आज हमारे कल से बेहतर है,

क्यूंकि हम मे जीने का हुनर है...


#SWETABARNWAL

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...