मुद्दत हो गई है कि ईन लबों पे हंसी आई नहीं,
हजार तूफ़ां आए कि आंख ये नम हुई नहीं,
विरान सी है ये ज़िंदगी कि इसमे कोई जुस्तज़ू नहीं,
जिए जा रहे हैं कि बस अब और कुछ पाने की आरज़ू नहीं...
#SWETABARNWAL
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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