Wednesday, 23 February 2022

 मुद्दत हो गई है कि ईन लबों पे हंसी आई नहीं,

हजार तूफ़ां आए कि आंख ये नम हुई नहीं,

विरान सी है ये ज़िंदगी कि इसमे कोई जुस्तज़ू नहीं,

जिए जा रहे हैं कि बस अब और कुछ पाने की आरज़ू नहीं...


#SWETABARNWAL

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